हैलो मित्रों, आज हम इस बारे में चर्चा करेंगे कि हम किसी शेयर का fundamental analysis कैसे  कर  सकते  हैं। 

यदि आपको शेयरों के fundamental analysis करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी नहीं है या आपको इसकी पर्याप्त जानकारी नहीं है, तो आप सही जगह पर हैं।

इससे पहले कि हम सीधे fundamental analysis करें, हमें यह जानने की आवश्यकता है कि fundamental analysis क्या है, हमें fundamental analysis करने की आवश्यकता क्यों है और इसके महत्व क्या हैं।

Fundamental Analysis एक शब्द नहीं है जिसे एक पंक्ति में परिभाषित किया जा सकता है। यह एक कंपनी के प्रबंधन, व्यापार मॉडल, बैलेंस शीट, लाभ और हानि विवरण, नकदी प्रवाह विवरण आदि के विस्तृत अध्ययन और शोध की प्रक्रिया है, जिसमें हम निवेश करने का इरादा रखते हैं।

According to Investopedia “ Fundamental analysis is a method of measuring a security’s intrinsic value by examining related economic and financial factors”

आम तौर पर निवेशक किसी शेयर के वास्तविक / आंतरिक मूल्य (Actual/ Intrinsic value) का पता लगाने के लिए fundamental analysis करते हैं। इस तरह यह पता लगाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है कि क्या स्टॉक ओवरवैल्यूड है या अंडरवैल्यूड है।

Fundamental analysis करके, एक अच्छी कंपनी को एक औसत कंपनी से अलग किया जा सकता है। इस प्रकार, किसी भी कंपनी में निवेश करने से पहले शेयरों का एक fundamental analysis करना बहुत महत्वपूर्ण है।

आम तौर पर इसका उपयोग दीर्घकालिक निवेश के लिए किया जाता है।

Fundamental analysis करके हम किसी कंपनी के आंतरिक मूल्य का पता लगा सकते हैं। यह अनुमान लगाने में मदद करता है कि क्या कंपनी निकट भविष्य में अच्छा लाभ कमा सकती है या नहीं। यह हमें निवेश करने के लिए उत्कृष्ट कंपनियों का पता लगाने में मदद करता है।

हम दो भागों में fundamental analysis कर सकते हैं।

गुणात्मक विश्लेषण (Qualitative aspect of Fundamental Analysis)

गुणात्मक विश्लेषण में, हम एक कंपनी की गुणवत्ता की जांच करते हैं । गुणात्मक विश्लेषण में निम्नलिखित  विश्लेषण शामिल है:-

व्यापार मॉडल (Business Model):-

उस कंपनी के व्यापार मॉडल को जानना बहुत महत्वपूर्ण है जिसमें हम निवेश करने का इरादा रखते हैं। इसलिए हमें यह जानने की जरूरत है कि कंपनी किस व्यवसाय में है, उसने कैसे आय अर्जित की, उसके खर्च क्या हैं, इसमें क्या जोखिम शामिल हैं,  क्या अवसर हैं , कानूनी अनुपालन क्या हैं आदि।

कंपनी के Management को जानना (Management of the company):-

येह मानना हे की एक अच्छी management एक बेकार कंपनी को सफलता के उंचिआयोंतक ले सकता हे जबकि एक बेकार management एक अच्छी कंपनी को डूबा सकता है | यही कारण है कि किसी भी कंपनी में निवेश करने से पहले management को जानना सबसे महत्वपूर्ण है जो वास्तव में कंपनी चला रहा है। आपको कंपनी के कर्मचारियों, समाज, व्यवसाय आदि के लिए management द्वारा लिए गए निर्णयों के बारे में अधिक जानकारी होनी चाहिए।

कंपनी के Background (Company’s Background)

इसमें हमे येह जानना होता है की कंपनी कब किसने, कैसे सुरु हुई | येह किस industry है | Industry  का फ्यूचर क्या हे क्या | कंपनी का Mission , Vision क्या हे और इसके लिए कंपनी  कोनसे decision ले रहा हे | कंपनी के प्रोमोटर्स शेयर होल्डिंग pattern क्या हे | कंपनी अपने रिटेल इन्वेस्टर के लिए क्या क्या decisions ले रहा हे आदि।

ऊपर लिखे गए जानकारी के सभी उत्तरों को जानने का सबसे अच्छा तरीका कंपनी की वेबसाइट पर जाना है। कंपनी के अतीत और वर्तमान की स्पष्ट छवि प्राप्त करने के लिए “हमारे बारे में” पृष्ठ (About us Page), ” प्रोडक्ट्स ” पृष्ठ (Products Page) और “प्रमोटर / निदेशक मंडल” पृष्ठ (Promoters/Board of Directors Page) देखें।

जब आपको कंपनी के Vision, Business Modelऔर प्रोडक्ट्स पसंद आएँ, तभी आगे की जाँच के लिए आगे बढ़ें |

मात्रात्मक विश्लेषण (Quantitative Aspect of Fundamental Analysis)

मात्रात्मक विश्लेषण (Quantitave analysis) वित्तीय विवरणों (Financial Performance)  का अध्ययन करने और वहां से निर्णय लेने के बारे में है|  Financial Statements के माध्यम से एक  कंपनी अपनी वित्तीय विवरणों की जानकारी देता है | इन Financial Statements में दिए गए मात्रात्मक विवरण (Quantitative Details) को इस्तेमाल करके निवेशक अपनी निवेश का निर्णय लेता लेता है | Balance Sheet, Profit and Loss Statement  और Cash Flow Statement , Financial Statements के 3 अहम हिस्सा है |

बैलेंस शीट  (Balance Sheet) :

बैलेंस शीट एक वित्तीय विवरण है जो किसी विशेष समय पर एक कंपनी की संपत्ति(Assets), देनदारियों (Liabilities), इक्विटी के रिकॉर्ड का प्रतिनिधित्व करता है।

संपत्ति कंपनी के स्वामित्व वाले संसाधनों का प्रतिनिधित्व करते हैं जबकि  देनदारियों ऋण का प्रतिनिधित्व करती हैं, और इक्विटी एक विशेष समय पर मालिक के फंड के मूल्य का प्रतिनिधित्व करती है।

संपत्ति में हाथ में नकदी(Cash in hand), बैंक में नकदी (Cash at Bank), सावधि जमा (Fixed Deposit), निवेश(investments), देनदार (Debtors), भूमि (land), भवन(Building) , चल संपत्ति(Movable assets) आदि जैसे मूर्त संपत्ति (Tangible Assets) और पेटेंट(patents), कॉपीराइट आदि जैसी अमूर्त संपत्ति (Intangible Assets) आदि शामिल हैं। एक कंपनी हमेशा अच्छी मशीनरी, निवेश, आदि में निवेश करके अपनी गुणवत्ता और संपत्ति के मूल्य को बढ़ाने की कोशिश करती है, ताकि वह अधिक बिक्री उत्पन्न कर सके और अपनी लाभप्रदता बढ़ा सके।

देनदारियों में ऋण(Loans), लेनदार(Creditors), प्रावधान(Provisions), कर भुगतान (Tax Liabilities) आदि शामिल होते हैं। एक अच्छी कंपनी हमेशा ऋण और कर पर अपने ब्याज का भुगतान करती है। एक कंपनी जिसके पास ऋण नहीं है, उसे हमेशा एक अच्छी कंपनी माना जाता है।

इक्विटी में शेयर पूंजी (Share Capital) और रिजर्व शामिल हैं। हमें यह देखने की जरूरत है कि किसी भी बैंक या किसी अन्य वित्तीय कंपनी के पास कोई शेयर है या नहीं, रिजर्व में पैसा का इस्तेमाल उस उद्देश्य के लिए ठीक से किया जाता है जिसके लिए इसे बनाया गया है।

यदि आपको बैलेंस शीट को पूरा पढ़ने के तरीके को सीखने की आवश्यकता है, तो नीचे टिप्पणी करें। हम इस बारे में एक ब्लॉग लिखेंगे।

लाभ और हानि विवरण (Profit and Loss Statement) :

लाभ और हानि विवरण किसी विशेष अवधि में कंपनी द्वारा अर्जित लाभ या हानि का प्रतिनिधित्व करता है। लाभ और हानि विवरण दो भागों में विभाजित है। एक हिस्सा आय और दूसरा हिस्सा व्यय है।

i) आय हिस्सा (Income Side)

जैसे की नाम से पता चल रहा हे, इस तरफ, ऑपरेटिंग और गैर-ऑपरेटिंग की सभी आय दर्ज की जाती है। सभी ऑपरेटिंग आय को  रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन (Revenue From Operation)  के तहत दर्ज किया जाता है और अन्य सभी आय को अन्य आय (Other Income ) के तहत रिकॉर्ड किया जाता है।

ऑपरेटिंग आय का अर्थ है अपने मुख्य व्यवसाय से उत्पन्न आय। उदाहरण के लिए यदि कोई कंपनी जूता व्यवसाय से जुड़ी है तो जूते की बिक्री से होने वाली आय उसकी ऑपरेटिंग आय है। ऑपरेटिंग आय को छोड़कर अन्य आय गैर-ऑपरेटिंग आय के अंतर्गत आता है।

 इसमें हमें यह जाँचने की आवश्यकता है कि क्या ऑपरेटिंग आय में निरंतर वृद्धि हो रही है या नहीं , ऑपरेटिंग से आय में कोई कमी है या नहीं, आय में इसकी वृद्धि दर क्या है, आय में कमी क्यों है, क्या इसमें कोई महत्वपूर्ण वृद्धि या हानि हुई  है, आदि। यदि किसी कंपनी की आय निरंतर विकास दर के साथ बढ़ती है तो यह एक अच्छी कंपनी मानी जाती है।

ii) व्यय हिस्सा (Expense Side)

इस पक्ष में सभी खर्च दर्ज किए जाते हैं। कुछ महत्वपूर्ण खर्चों में खरीद व्यय, मूल्यह्रास व्यय, ब्याज व्यय, वेतन व्यय आदि शामिल हैं।

इसमें, हमें यह जांचने की आवश्यकता है कि कंपनी ने अपने ब्याज व्यय का भुगतान किया है या नहीं और यह कितना, कैसे इसकी मूल्यह्रास रिकॉर्ड करता है, आदि। यदि कोई कंपनी कम ब्याज का भुगतान करती है तो इसे एक अच्छी कंपनी माना जाता है।

लाभ और हानि विवरण में, हमें यह जांचने की आवश्यकता है कि इसकी आय के खिलाफ इसका लाभ क्या है। क्या किसी कंपनी आदि की लाभप्रदता में निरंतर वृद्धि हो रही है, एक कंपनी जो 10 वर्षों तक किसी भी नुकसान को रिकॉर्ड नहीं करती है उसे एक अच्छी कंपनी माना जाता है।

नकदी प्रवाह विवरण (Cash Flow Statement)

नकदी प्रवाह विवरण एक व्यापार की नकदी प्रवाह और समय की अवधि में बहिर्वाह का एक रिकॉर्ड दर्शाता है। यह दर्शाता है कि नकदी कहां से कारोबार में आती है और समय के साथ कैसे और कहाँ  खर्च  हुआ।

नकदी प्रवाह विवरण महत्वपूर्ण है क्योंकि व्यवसाय के लिए अपनी नकदी की स्थिति में हेरफेर करना बहुत मुश्किल है। ऐसी संभावना हो सकती है कि कंपनी कमाई में हेरफेर कर सकती है, लेकिन बैंक में नकली नकदी के लिए यह कठिन है। इस कारण से, कुछ निवेशक कंपनी के प्रदर्शन के अधिक रूढ़िवादी उपाय के रूप में नकदी प्रवाह विवरण का उपयोग करते हैं।

वित्तीय अनुपात (Financial Ratios)

स्टॉक का  fundamental analysis करने के लिए हमें वित्तीय अनुपात जैसे पी / ई अनुपात (P/E Ratio) , पी / बी अनुपात (P/B ration), आरओई (ROI) और लाभांश उपज (Dividend Yield) की जांच करनी होगी। स्टॉक की fundamental analysis  यात्रा शुरू करने के लिए वित्तीय अनुपात की जाँच एक अच्छा तरीका है। ऐसा करने पर, आप किसी भी प्रतिष्ठित स्क्रिनर के लिए जा सकते हैं और मानदंड संपादित कर सकते हैं। वित्तीय अनुपात में, पी / ई अनुपात सबसे विश्वसनीय है। यह मूल्य-से-आय अनुपात (Price to Earning) है, जो किसी कंपनी की वर्तमान शेयर की कीमत का प्रति शेयर आय का अनुपात है। संक्षेप में, यह निवेशक को उस कंपनी की कमाई का एक रुपया प्राप्त करने के लिए  कितने  रुपये  कंपनी में निवेश करने कि जरूरत हे दर्शाता है |

एक कम पी / ई मूल्य बताता है कि एक कंपनी वर्तमान में अंडरवैल्यूड हो सकती है या यह संभव हो सकता है कि, यह अपने पिछले रुझानों की तुलना में असाधारण रूप से बेहतर कर रहा है। यह केवल कंपनी का P / E नहीं है जिसकी आपको गणना करने की आवश्यकता है। आपको यह भी जानना होगा “उद्योग पी / ई (Industry P/E) अनुपात क्या है?”

मान लीजिए कि किसी कंपनी का P / E मान 7 है और उद्योग P / E मान 15. है। इसका मतलब है कि कंपनी का स्टॉक अबाधित है और भविष्य में बढ़ने की काफी संभावनाएं हैं।

इन सभी चीजों को करने के बाद आपको उद्योग / क्षेत्र की विकास दर की जांच करने की आवश्यकता होती है जिसमें कंपनी आती है जैसे टाटा मोटर्स ऑटोमोबाइल उद्योग के अंतर्गत आता है। अवसर, खतरे आदि क्या हैं, फिर उस कंपनी में निवेश करना है या नहीं, इस बात का फैसला लें।

अब आप Fundamental analysis करने के लिए तैयार हैं।

अगर आप शेयर मार्किट में नए हैं तो पहले येह ब्लॉग पढ़िए|

 Happy investing !!! Cheers !!!

आशा करता हूँ किआपको  ये blog अच्छा लगा होगा| इसी तरह के blog के लिए हमारे वेबसाइट को visit करते रहिये | और हमें फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर पर फॉलो करना ना भूलें।

Disclaimer :- इस ब्लॉग में मैंने जो कुछ भी कहा है वह केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्य के लिए है। यदि आप शेयर बाजार में कोई पैसा खोते हैं तो मैं किसी भी नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं हूं।